Hypochlorous Acid

HOCl

मानव शरीर रक्षा और उपचार करने के लिए एक ऑक्सीकारक पैदा करता है, सीखें कि अब इसे प्राकृतिक रोगाणुनाशक क्यों माना जाता है। 

हाइपोक्लोरस तेज़ाब के विषय में - HOCL  

HOCL क्या है? 

त्वरित तथ्य  

  • HOCL हाइपोक्लोरस तेज़ाब के लिए एक वैज्ञानिक सूत्र है, एक कमजोर तेज़ाब हल्के नींबू के रस के समान होता है। 
  • उपचार और संरक्षण के लिए सभी स्तनधारियों में श्वेत रक्त कोशिकाओं द्वारा HOCL प्राकृतिक रूप से बनाया जाता है। 
  • HOCL एक शक्तिशाली आक्सीकारक है जो बैक्टीरिया,फफूँद और वायरस पर हमला करने के खिलाफ प्रभावी है। 
  • खारे पानी के घोल पर बिजली चलाकर HOCL उत्पन्न करना 1970 के दशक में विकसित किया गया था। 
  • HOCL अब स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, जल प्रशोधन, और सामान्य स्वच्छता में उपयोग किया जाता है। 
  • HOCL को कैसे बनाया जाता है? 

    इलेक्ट्रोलिसिस का इतिहास  

  • माइकल फैराडे ने इलेक्ट्रोलिसिस के नियमों को खोजा था और व्यावसायिक तौर पे ये 1870s में उपलब्ध हुआ। 
  • HOCL को नमकीन पानी के इलेक्ट्रो-केमिकल एक्टिवेशन (ECA) से उत्पन्न करना 1970s में विकसित किया गया था। 
  • पुरानी ECA तकनीक नमकीन पानी को HOCL और NaOH के दोनों घोलों में प्रवेश कराने के लिए मेम्ब्रेन का प्रयोग करते थी। 
  • 1980s में, एकल धरा प्रणालियों को विकसित किया गया था जो बिना उपजात के HOCL के घोल का उत्पादन कर सके। 
  • हाल ही में, एकल धरा प्रणालियों का नवोत्पाद किया गया है जो लंबे समय तक टिके और ज़्यादा स्थिर घोलों को उत्पन्न कर सके। 
  • HOCL रोगाणुओं का खात्मा करने में इतना प्रभावी क्यों है? 

    हाइपोक्लोरस तेज़ाब (HOCL) बनाम सोडियम हाइपोक्लोराइट (क्लोरीन ब्लीच) 

    हाइपोक्लोराइट आयन में नेगेटिव इलेक्ट्रिकल चार्ज होता है, जबकि हाइपोक्लोरस तेज़ाब में कोई इलेक्ट्रिकल चार्ज नहीं होता। हाइपोक्लोरस तेज़ाब जल्दी काम करता है, जो कि बैक्टीरिया को कुछ ही सेकंड में ओक्सिकृत करने की क्षमता रखता है, जबकि यही काम करने के लिए हाइपोक्लोराइट आयन को आधे घंटे तक लग सकते हैं। रोगाणु सतहों में एक नेगेटिव विद्युत चार्ज होता है जिसके परिणामस्वरूप जीवाणु सतहों के क्षेत्र में नेगेटिव चार्ज हाइपोक्लोराइट आयन का अपकर्षण होता है। जीवाणुओं को मारने के लिए हाइपोक्लोराइट आयन को कम प्रभावी बनाते हैं। दो यौगिक पदार्थ का अनुपात पानी की सापेक्ष अम्लता (pH) द्वारा निर्धारित किया जाता है। हाइपोक्लोरस तेज़ाब को अधिक हावी बनाने के लिए जल उपचार विशेषज्ञ Ph स्तर को समायोजित कर सकते हैं, क्योंकि यह बैक्टीरिया को मारने में अधिक कुशल है। हाइपोक्लोरस तेज़ाब में विद्युत चार्ज की कमी से यह रोगाणुओं के आस-पास सुरक्षात्मक बाधाओं को अधिक कुशलतापूर्वक भेदने की अनुमति देता है। 

    HOCL का घरेलु प्रयोग  

      घरेलु इलेक्ट्रोलिसिस प्रणालियाँ  
    ऐसी बहुत सी घरेलु इलेक्ट्रोलिसिस प्रणालियों को विकसित किया गया है जो समुद्री नमक और पानी का इस्तमाल करके स्थिर हाइपोक्लोरस तेज़ाब को उत्पन्न कर सकती हैं। आसुत सिरके को कभी-कभी मुक्त क्लोरीन घोल के ph को कम करने के लिए जोड़ा जाता है जिसपर हाइपोक्लोरस तेजाब के अणु ज़्यादा हावी होता है। जब घर के प्रणाली का चुनाव कर रहे हो, ध्यान रखने वाली बात है इलेक्ट्रोलिसिस सैल की गुणवत्ता। उच्च गुणवत्ता वाले तंत्र की कीमत ज़्यादा हो सकती है लेकिन सेल को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली धातुओं में मिश्र धातु की स्थायित्व के कारण अधिक समय तक टिकाऊ रहता हैं। 

      लाभ क्या हैं? 
    क्लोरीन ब्लीच के विपरीत, हाइपोक्लोरस तेज़ाब, 100% सुरक्षित और उत्तेजना-रहित है। अगर ये आपकी आँखों में या चमड़े पर लग जाए, तो ये नहीं जलता। अगर भूल से भी इसे निगल लिया गया हो, तो भी पूर्तः हानिरहित है। फिर भी, ये क्लोरीन ब्लीच की तुलना में सूक्ष्म रोगाणुओं को मारने में 70-80 गुना प्रभावी है। 

      इसका प्रयोग कहाँ किया जा सकता है? 
    घर में, हाइपोक्लोरस तेज़ाब कहीं भी उपयोगी है, आपको एक सैनीटाइज़र की ज़रुरत होगी पर ज़हरीले रसायन का इस्तमाल करने में आराम महसूस न करें। एक पूर्ण उदाहरण रसोईघर में है, साग को बजाय पानी के धोने के, हाइपोक्लोरस तेज़ाब का इस्तमाल करें। या फिर निजी सामानों के लिए जैसे कि टूथब्रश या उस्तरा, हाइपोक्लोरस तेज़ाब सुरक्षित है। लौंड्री को सैनीटाइज़ करना चाहते हैं कपड़ों को नुक्सान पहुंचाए बिना या उनका रंग फीका किए बिना, तो उत्तर है हाइपोक्लोरस तेज़ाब। 

    यद्यपि हाइपोक्लोरस तेज़ाब आमतौर पर ब्लीचिंग या मलिनकिरण का कारण नहीं बनता है, लेकिन हाइपोक्लोरस तेज़ाब के संपर्क में आने पर कुछ निम्न गुणवत्ता वाले रंगों का पतन हो  सकता है।

    HOCL का व्यावसायिक प्रयोग  

      मेम्ब्रेन सैल इलेक्ट्रोलिसिस 
    पिछले 20 सालों में हाइपोक्लोरस तेज़ाब को उत्पन्न करने वाली तकनीक का भयंकर रूप से विकास हुआ है। बाज़ार पर मेम्ब्रेन सैल तकनीक का दबदबा हुआ करता था जो नमकीन पानी को दो अलग अलग धाराओं में डालने के लिए उच्च दबाव का इस्तमाल करती थी, एक अम्लीय धारा और क्षारीय धरा। अम्लीय धारा में हाइपोक्लोरस तेज़ाब (HOCL), एनोलिट या ऑक्सीकारक एजेंट होता है, और क्षारीय धारा में सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), कैथोलाइट या घटाने वाला एजेंट होता है। इन दोनों ही प्रणालियों का फायदा ये होता था कि उपयोगी घोल उत्पन्न हो जाते थे, एक सैनीटाइज़र और एक डीग्रीसर। इन प्रणालियों का जो नकारात्मक पहलु था वो ये की ये बहुत ही मेहेंगे हुआ करते थे, जिसको उच्च रखरखाव की आवश्यकता होती थी, और ऐसे घोलों को उत्पन्न करते जो बहुत ही कम समय में अपना ऑक्सीडेशन-रिडक्शन क्षमता (ORP) खो देते।  

      एक सैल का इलेक्ट्रोलिसिस 
    एक सैल इलेक्ट्रोलिसिस के विकास के साथ ही, इनमें से बहुत सी बाधाओं को दूर किया गया था। एकल सैल इलेक्ट्रोलिसिस मेम्ब्रेन पर उच्च दबाव का इस्तमाल नहीं करती, इसलिए बहुत ही थोड़ी या किसी भी रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती। और क्योंकि एकल सैल तकनीक नमकीन पानी को विरोधी ऑक्सीडेशन रिडक्शन क्षमता और विरोधी pH की दोनों धाराओं पर दबाव नहीं डालता। एक ज़्यादा स्थिर घोल उत्पन्न होता है, घोल जो संतुलन प्राप्त करने की मांग नहीं कर रहा है। एकल सैल प्रणालियाँ सिर्फ एक ही घोल उत्पन्न करती हैं, एक अनोलाईट जो pH रेंज 5 से 7 के बीच का हो।  यह pH सीमा हाइपोक्लोरस तेज़ाब के लिए एक स्थिरता और एक स्वछता के लिए प्रयोग होने वाले रसायन की प्रभावशीलता के रूप में सर्वोत्कृष्ट है। 

    लम्बे समय के लिए हाइपोक्लोरस तेज़ाब (> 200 पीपीएम) की उच्च सांद्रता में डूबे हुए स्टेनलेस स्टील भी खराब हो सकते हैं।

    खाद्य सुरक्षा  

    अधिकांश अनुसंधान हाइपोक्लोरस तेज़ाब के खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रयोगों के सन्दर्भ में हुए हैं।  जब खाद्य सुरक्षा आधुनिकीकरण अधिनियम (FSMA) 2011 में कानून में हस्ताक्षरित किया गया था  संभवतः ऐसा कोई भी खाद्य सेनिटाईज़र नहीं है जिसपर हाइपोक्लोरस तेज़ाब से ज़्यादा अनुसंधान किया गया हो या उसको समझा गया हो।  ये अनुसंधान साफ़ दर्शाता है कि  

      उपरी साफ़ सफाई  

      हाइपोक्लोरस तेज़ाब बनाम क्वाटरनरी अमोनियम (क्वाट्स) 
    रसायन जैसे की क्वाट्स के मुकाबले हाइपोक्लोरस तेज़ाब खाद्य संपर्क सतहों को साफ़ करने के लिए ज़्यादा फायदेमंद होते हैं क्योंकि क्वाट्स खाद्य पर सुरक्षित नहीं होते। क्वाट्स से साफ़ करने से पहले, सफाई हो सके इसके लिए उस क्षेत्र से पूरे खाने को हटाना अनिवार्य है। जब हाइपोक्लोरस तेज़ाब का इस्तमाल करते हैं तो इसकी आवश्यकता नहीं है। भोजन के संपर्क में आने के बावजूद हाइपोक्लोरस तेज़ाब लगातार पूरे कार्य दिवस में उपयोग किया जा सकता है। 

      प्रत्यक्ष खाद्य स्वच्छता 

      हाइपोक्लोरस तेज़ाब बनाम ओज़ोन  
    हाइपोक्लोरस तेज़ाब के ओजोन से ज़्यादा फायदे हैं। ओजोन एक गैस है और घोल में स्थिर नहीं रहता है इसलिए इसका उपयोग संपर्क सतहों को स्वच्छ करने के लिए नहीं किया जा सकता। हालांकि ओजोन को भोजन की स्वच्छता के लिए प्रयोग किया जाता है, हालांकि इसे लगातार पुन: उत्पन्न करते रहना चाहिए क्योंकि यह लगातार हवा में घोल छोड़ता है। चूंकि ओजोन फेफड़ों और श्वसन पथों के लिए असहज है, ओजोन सांद्रता में सीमित है जिसका उपयोग किया जा सकता है, इसलिए ऑक्सीकरण क्षमता को सीमित करना जिसे सूक्षजीवी रोगजनकों को मारने के लिए प्राप्त किया जा सके। हाइपोक्लोरस तेज़ाब उत्तेजना रहित है और घोल में भी स्थिर है। हाइपोक्लोरस तेज़ाब को भोजन की सफाई के लिए उच्च सांद्रता (60 ppm) पर इस्तेमाल किया जा सकता है, न कोई धोने की आवश्यकता होती है। 

    FDA खाद्य संपर्क अधिसूचना 1811 60 ppm तक कच्चे या संसाधित फल और सब्जियों, मछली और समुद्री भोजन, मांस, मुर्गी और खोल वाले अंडों पर हाइपोक्लोरस तेज़ाब का उपयोग करने की अनुमति देता है। Sanitizing Leafy Greens
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